किताबें बोलती है ||
सच तो है ........... अगर किताबें न होती तो हम कितने अधूरे होते | न कुछ समझ पाते ना कुछ समझा पाते | किताबों का हमारे जीवन में होना एक वरदान है | इस वरदान का हमें सही तरीके से प्रयोग करना चाहिए | हमारे यहां किताबों को माँ सरस्वती के रूप में देखा जाता है .....उन्हें पूजा जाता है |
कभी -कभी कई ऐसे प्रश्न होते है हमारे मन में ...जिन्हे हम सिर्फ किताबों की मदद से ही उनके हल ढूंढ पाते है | किताबें जीवन का सार है | हम सभी का जीवन किताबों पर ही निर्भर है ............लेकिन मुख्यतः हमारे शिक्षक ,हमारे बच्चे , क्षात्र ........इत्यादि इनके जीवन में पुस्तक एक वरदान है
किताबें हमारे चरित्र निर्माड में अहम् भूमिका निभाती है |
बचपन से लेकर युवा अवस्था और युआ अवस्था से लेकर ...वृद्धा अवस्था तक ...........किताबें ही एकमात्र हमारी सच्ची दोस्त और सही मार्गदर्शक होती है ................
एकांत जीवन को बिभिन्न रंगो में बाटने वाली ये किताबें ही तो है ...........
हमें अधिक और अधिक शिक्षित करने वाली ये किताबे ..............न सिर्फ हमारे लिए .........बल्कि उन सभी लोगो के लिए भी जरुरी है .........जिनके पास पैसे नहीं है पढ़ने को |
तो हम सभी को ये संकल्प लेना चाहिए की हम किताबें अधिक वितरण करेंगे |
हरेक बच्चे को उसकी शिक्षा में हम उसका सहयोग देंगे |
अपनी पुस्तकों का सही उपयोग ही है ................. एक पुस्तक से अधिक से अधिक लोगो तक ज्ञान पहुँचाना ............
तो खुद भी साक्षर बनियें
और ......
दुसरो की भी मदद कीजिये साक्षर बनने में ||
किताबें बितरण कीजिये
किताबें पढ़िए ...
सचमुच किताबें
बोलती है .......
तो सुनिए
और एक .......
बेहतरीन शब्द बन के उभर आइये
जय हिन्द
जय भारत ||
प्रिया मिश्रा :))
24
Comments
Post a Comment