हम जिस पृथ्वी को
अपना देश
पड़ोसी का देश

अपना राज्य
पड़ोसी राज्य

अपना शहर
पड़ोसी का शहर

अपना घर
दूसरे का
घर ....

ऐसी ..
एक अंधी
सोच रखते हुए
बरबाद कर रहे है
 
और सोच रहे है
की कोइ स्वर्ग हमें
प्राप्त होगा

इस पृथ्वी से
कही दूर आसमान में

भर्म है  .....

दरहसल ...
ये पृथ्वी
ये प्रकृति ही
स्वर्ग है


प्रिया मिश्रा :)) 

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