भीड़ में कम रहने वाले लोग
भीड़ के बात -चित्त का केंद - बिंदु होते है

यही उनकी उपलब्धि है
वे शामिल नहीं ....

फिर भी वे
मौजूद है ....

हर शहर के
हर जुलुश में ||

प्रिया मिश्रा :)) 

 

 

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