कितने फूल बिखर गए है |
कितने फूल बिखरेंगे ||

हमने छोड़ दिया है |
माली बनना ||

नन्हे पौधे सूखते जा रहे है |
बीज अब पनपता नहीं है ||

कही खो गया है |
वो बागान हमारा ||

अब सारे फूल कैद है
गमलों में
और गमला
लोगो की सोच
जितना रोज - रोज
छोटा होता जा रहा है ||

प्रिया मिश्रा :)) 

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