"रुक सी गयी है जिंदगी "

रुक सी गयी है ये जिंदगी
तो इसे चलाओ
पुरानी चाल छोड़ो
कोइ नहीं कहानी बनाओ
रुक सी गयी है जिंदगी
तो इसे चलाओ ||

शाम के दीपक से
सुबह का सूरज जगाओ
अगर ना निकले सूरज तो ,
दीपों से ही दीपों का उत्सव मनाओ 
रुक सी गयी है जिंदगी
तो इसे चलाओ ||

ना रूठो खुद से
ना कोइ शाम यही रहने दो
डूबते  सूरज को भी नमस्कार करो
उसे भी जरा एहसास दिलाओ
शाम भी महत्वपूर्ण है
सुबह को भी गले लगावो
रुक सी गयी है जिंदगी
तो ऐसे गले लगावो ||

रुक गए हो तो
जरा ठहर के
संभल के ,
जरा सोच - विचार के
फिर से कदम बढ़ाओ
रुक सी गयी है जिंदगी
तो इसे चलाओ

प्रिया मिश्रा :)

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