"चाँद अपने सफ़र  पे था और हम "

चाँद अपने सफर में था और हम
भी संग - संग  चल पड़े

उसकी रौशनी के रास्तो में
हमने देखा एक नायाब  तोफा
जो जिंदगी थी
हमने गले लगाया
और मुस्कुरा के
चाँद के साथ ढलता गया
मैं धीरे - धीरे ,
 सूरज में बदलता गया ||

प्रिया मिश्रा :)

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