" मैं खुद ही लिखती हूँ "

जिंदगी के सारे सुर
मैं खुद ही बून लेती हूँ
मैं अपने जीवन की कहानी
खुद ही लिखती हूँ ||

कोइ सपना कच्चा नहीं
कोइ सपना पक्का नहीं
जो साथ चला वो अपना है
जो छूट गया वो अपना नहीं
हर रंग के अक्षरों से
मैं अपनी जिंदगानी भर्ती हूँ
मैं अपने जीवन की कहानी
खुद ही लिखती हूँ ||

मैं थक भी जाऊँ
तो उमीदे पाँव  पसार लेती है
ये मुझे जिन्दा करती है
मुझे नया हौसला दे
मुझे सवाँर  लेती है
ये हौसलों की उड़ान मैं
खुद ही लिखती हूँ ||

मैं कितनो की प्रेरणा हूँ
मैं कितनो के शब्द हूँ
मैं कितनो की अभिलासा हूँ
मैं हर अभिलासा में रंग भर लेती हूँ
मैं अपने जीवन की कहानी
खुद ही लिखती हूँ ||

प्रिया मिश्रा :)

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