कमरे में सन्नाटा और  आधी टपकती हुई छत  रात भर ऐसे गुजरा था उसने और सुबह उसके जनाजे को सजा के ले गए | इंसानियत को मार कर सब नाम कमाने में लगे हुए थे , और पुण्य  मुँह बाये खड़ा रहा ||
प्रिया  मिश्रा।।

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