जब भी कभी किसी को "उदाश" देखती हूँ सोचती हूँ
पूछ लूँ उससे उसके "उदासी" का कारन
एक "रोते" हुए व्यक्ति से उसके "आसूं" छीन लूँ
और "उपहार" स्वरुप "भेट" दूँ उसे उसकी "मुस्कराहट"
फिर जाने क्यों "डर" लगता है
कहीं मैं ही ना "रुला" बैठु उसे
जो आँखों में "तेज़ाब" डाले बैठा है
ये "मानव" व्यवहार बड़ा कठिन है
यहाँ "कब" कौन "शिकार "हो जाये
"कब" कौन "शिकार" कर जाये कुछ पता नहीं
बाकि सब तो मोह - माया है ||
प्रिया मिश्रा :)
"जीवन की आपा - धापी " जीवन की आपा - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये दो सिक्के जमीं पे गिर गए तो गम ना कर हाथो से वो , तेरा करीबी रिस्ता ना छूट जाये || बड़े मुश्किल से मिलते हैं दिल से हाल पूछने वाले तुझसे चाहने तुझे सराहने वाले कही इस आप - धापी में कोइ वो चेहरा ना ग़ुम हो जाये || जीवन की आप - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये || कोइ गुजर रहा होगा तेरे इन्तजार के पलों से वो तेरा यार ना रूठ जाये जीवन की आपा - धापी में वो तेरा प्यार का गुलिस्तां ना छूट जाये || थाम लेना उस हमदम के हाथो को तेरा हमकदम तेरा हमसफ़र ना छूट जाये जीवन की आपा - धापी में तेरी जमीं तेरा आसमान ना छूट जाये || तू नहीं कोइ खुदा कही तुझे ये गुमा ना हो जाये संभाल लेना खुद को इस चकाचौंध से की कोइ तेरा अपना अँधेरे में ना ग़ुम हो जाये || जीवन की आपा - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये || प्रिया मिश्रा :)
thank you :)
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