"मैं तो बस "

मैं तो बस एक मुसाफिर हूँ
चलना जनता हूँ
मंजिल नहीं पता
बस रस्ते का साथी हूँ
रास्ता जनता हूँ ||

मैं तो बस फूल हूँ
खिलना जनता हूँ
मुरझाने का समय नहीं पता
बस खिलना जानता हूँ
मेरी खुसबू दूर तक फैलेगी
मैं तो बस दिलो में बसना जनता हूँ

मैं तो बस कहानी हूँ
पन्नो में बसना जनता हूँ
कोइ पढ़ ले तो मुस्कुरा दे
बस हरेक शब्द ऐसा चाहता हूँ ||

मैं तो बस सुबह हूँ
खिलना जनता हूँ
सूरज तपे न
बस मीठी धुप दे जाये
मैं तो इतना चाहता हूँ ||

मैं तो बस कविता लिखता हूँ
पसंद आये तो सुक्रिया कहना
न आये तो मुस्कुरा देना
मैं कवी हूँ
शब्दों से खेलना जनता हूँ ||

प्रिया मिश्रा :)

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