"क्यों है ऐसा"

आज फिर रोने को जी चाहता है
खबर नहीं है
क्यों है ऐसा

एक कमी सी लगती है
कुछ खाली  सा लगता है
खबर नहीं है
क्यों है ऐसा

एक शाम को तेरे बिना गुजारना
एक शाम को तेरे संग  गुजारना
एक शाम ठहर जाती है
एक शाम रुला जाती है
खबर नहीं है
क्यों है ऐसा

तू मुझमे कही बस गया है
अब जाने की जिद न करना
कुछ टूट जायेगा मुझमे
तेरे दर्द को संभाल लुंगी
लेकिन कुछ छूट जायेगा मुझमे
तेरी खामोसी
मेरे शब्द छिन लेगी
खबर नहीं है
क्यों है ऐसा

तेरा होना मेरी जिंदगी है
तेरा न होना मुझे बूत बना देता है
सब कुछ खो के पाया है तुझे
अब तू न खोना
तुझे पाने की जिद्द नहीं ,शिद्दत हैं
खबर नहीं हैं
क्यों है ऐसा

प्रिया मिश्रा :)  

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