सबको घर जाने की जल्दी हैं
कोइ ट्रैन से जाता है |
कोइ बस से जाता हैं |
किसी की बैलगाड़ी लगी है |
कोइ रास्तो के साथ सफर में है |
कोइ हमसफ़र के साथ सफर में है |

हमने धरती के बिछावन पर
चाँद का सामियाना लगाया  है |
हमारा कोइ घर नहीं हम बंजारे है |
न ही कोइ सफर हैं
न ही कोइ मंजिल है ||

बस नदियों के तरह बहते हुए
एक किनारे से दूसरे किनारे
चलते जाना हैं ||

प्रिया मिश्रा :)

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