" तुम्हारी यादो का ताना - बाना "

मैं तुम्हारी यादो का ताना - बाना
बुनने लगी हूँ
थोड़ा डरने लगने हूँ
थोड़ा बुझी - बुझी सी रहने लगी हूँ
मैं तुम्हारी यादों में
डूब के याद बन जाना चाहती हूँ
मैं तुम्हे याद करके हर एक रोज
गुजार के,
एक दिन खुद गुजर जाउंगी
फिर न याद रहेगी
न याद आवोगे ||

प्रिया मिश्रा :)

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