सर्दिया आ गयी हैं |

सर्दिया सुरु हो गयी हैं | मुझे बहोत पसंद हैं | आपको भी होगी | सर्दियों में हम जो चाहे खा सकते हैं |  पकोड़े के साथ चाय  का मजा बारिश के मौसम के बाद सर्दियों में आती हैं | गुनगुनी धुप और ओश की बुँदे दोनों अति लुभावनी होती हैं | गेंदे के फूलो से सारा बगीचा भरा रहता हैं | गन्ने की खेतो में सिर्फ गन्ने दीखते हैं | कम्बल, स्वेटर और पुलोवर का मौसम , "सर्दी का मौसम " | बच्चो के स्कूल की छुटिया भी रहती हैं इस मौसम में | सब कुछ कितना अच्छा होता हैं , हैं ना |
लेकिन कभी सोचा हैं | कुछ लोगो को सर्दिया नहीं भी अच्छी लगती होंगी | कभी सोचा हैं क्यों ?
क्युकी उनके पास सर्दी से बचने के लिए कुछ भी नहीं | खाने के लिए खाना नहीं | पहनने को स्वटर तो दूर की बात है, कपड़े तक नहीं हैं उनके पास | पकोड़े तो रहने दे उनके पास रोटी का भी सुख नहीं | कुछ लोग फुटपाथ पर ही ठन्डे से मर जाते है | तो ये मजे का मौसम हैं या बिदाई का ? सोचे ?
मुझे लगता हैं ये सोचने का वक़्त नहीं हैं करने का हैं | तो कुछ करने की सोचे | जब भी आप किसी को सड़क पे ठन्डे से सिकुड़ते हुए देखे उन्हें एक कम्बल अवस्य दे | कुछ कपड़े देदे  | खाने पिने की चीजे देदे | किसी बच्चे को स्वेटर दे दे | उनके लिए चपले दे दे | नए नहीं दे सकते तो पुराने ही दे दे | लेकिन दे जरूर | अगर एक के लिए सिर्फ एक आदमी खड़ा हो जाये तो मानवता फिर से साँस लेने लगेगी | तो मानवता को जिन्दा रखे |
जितने पैसे हम दारू में | पार्टियों में | बेकार के कामो में लगते हैं सोचिये उतने पैसे अगर हम किसी के जीवन को सुधरे में लगाए तो कितना अच्छा हो | किसी के चेहरे की मुस्कराहट बनिए | आपको खुश रहने के लिए किसी बाहरी चीजों की जरुरत नहीं पड़ेगी |
और याद रखे आप सिर्फ माध्यम हैं आप भगवान् नहीं हैं | तो अपने दिए चीजों पे अभिमान न करे | बस सम्मान करे | और किसी को भीख समझ के कुछ न दे लोगो के साथ अपनी चीजों के साथ खुशिया भी साझा करे |
तो चलिए एक वादा ले अब से कोइ निम्न नहीं हैं | सब हमारे बराबर के हैं | और सबकी रक्षा हमारी जिम्मेदारी हैं |

जय हिन्द
जय  भारत

प्रिया मिश्रा :)

Comments

Popular posts from this blog