वो दिन ||
वो दिन
वो तारीख
वो माह
वो साल
मैंने समंदर में डाले
मैंने गंगाजल मुँह में डाला
खुद का तरपन किया
फिर मुखाग्नि दी खुद को
और पुरानी यादो के साथ
मैंने खुद का अंतिमसंस्कार किया ||
बड़ा मुश्किल था
खुद को मारना
लेकिन
"हम" से
"मैं" के लिए
एक बार जलना पड़ता हैं
रोज सुलगने से अच्छा हैं
प्रिया मिश्रा :)
वो दिन
वो तारीख
वो माह
वो साल
मैंने समंदर में डाले
मैंने गंगाजल मुँह में डाला
खुद का तरपन किया
फिर मुखाग्नि दी खुद को
और पुरानी यादो के साथ
मैंने खुद का अंतिमसंस्कार किया ||
बड़ा मुश्किल था
खुद को मारना
लेकिन
"हम" से
"मैं" के लिए
एक बार जलना पड़ता हैं
रोज सुलगने से अच्छा हैं
प्रिया मिश्रा :)
thank you g :)
ReplyDelete