उसे लगा मैंने चाभियों का गुच्छा
अपने कमर में बाँधा हैं ||
उसे ये नहीं दिखा मैं
रात भर कमर दर्द से सोई नहीं
मैं बस आधी नींद लेती थी उसके मुकाबले
और लाँछन पूरा लिया था
जितनी चाभियाँ थी
उतने लाँछन थे ||
अब मैं आजाद हूँ
सारा भार उसे देके
अब बेपरवाही में
राहत हैं ||
अब तो लांछन मिले या
देश निकला
सब मंजूर हैं
अब मैं अपराधी हूँ ||
प्रिया मिश्रा :)
अपने कमर में बाँधा हैं ||
उसे ये नहीं दिखा मैं
रात भर कमर दर्द से सोई नहीं
मैं बस आधी नींद लेती थी उसके मुकाबले
और लाँछन पूरा लिया था
जितनी चाभियाँ थी
उतने लाँछन थे ||
अब मैं आजाद हूँ
सारा भार उसे देके
अब बेपरवाही में
राहत हैं ||
अब तो लांछन मिले या
देश निकला
सब मंजूर हैं
अब मैं अपराधी हूँ ||
प्रिया मिश्रा :)
Excellent
ReplyDeletethank you g :)
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