तू  ठहरा नहीं गुजर गया

तू ठहरा नहीं गुजर गया
मेरे साथ चला था
तुझे भागने की जल्दी थी
तूने रस्ते बदल लिए
तू दूर कही निकल गया
तू ठहरा नहीं गुजर गया ||

 मैं ठहरी बाट  जोहने
पग की मिटटी संभाली थी
लोग भी मुझपे हस्ते थे
मैं पगली थी
दीवानी थी
तूने तेरा सबेरा ढूंढा
तू किरणों के पीछे भागता गया
तू ठहरा  नहीं गुजर गया ||

मेरे दरवाजे तक
तेरा निशान जो था
जो आता था तुझे याद दिलाने
वो हवा उड़ा  के लिए
ईटे सारी  गिर गयी
यादों  की
वो आखरी मकान भी जाता रहा
तू ठहरा नहीं गुजर गया ||

तू बना परदेशी
प्रदेश तेरा ठिकाना बना
वो चूल्हा घर का
जला नहीं
वो जर - जर  हैं
ना कभी उसपे पकवान पके
ना कभी उसमे  कोइ
आग लगी ||
उमीदे फुकी हमने
वो जो धुएं के साथ तेरी खुसबू आती थी
वो भी अब जाती रही
चूल्हा ठंडा हो गया
और अरमान
जलते रहे
और तू
ठहरा नहीं गुजर गया ||

मैंने बहोत दूर तक देखा था
जाते निशान दिखे थे तेरे पैरो के
आते कभी दिखे ही नहीं
मैं हवाओ से लड़ती रही
और वो
एक निशान  भी जाता रहा
तू ठहरा नहीं
तू गुजर गया ||

प्रिया मिश्रा :)

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