this blog is belong to hindi poem, i really like to write poem. you all people enjoy my new poem collection . so please enjoy and appreciate my poem . thank you :)
"जीवन की आपा - धापी " जीवन की आपा - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये दो सिक्के जमीं पे गिर गए तो गम ना कर हाथो से वो , तेरा करीबी रिस्ता ना छूट जाये || बड़े मुश्किल से मिलते हैं दिल से हाल पूछने वाले तुझसे चाहने तुझे सराहने वाले कही इस आप - धापी में कोइ वो चेहरा ना ग़ुम हो जाये || जीवन की आप - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये || कोइ गुजर रहा होगा तेरे इन्तजार के पलों से वो तेरा यार ना रूठ जाये जीवन की आपा - धापी में वो तेरा प्यार का गुलिस्तां ना छूट जाये || थाम लेना उस हमदम के हाथो को तेरा हमकदम तेरा हमसफ़र ना छूट जाये जीवन की आपा - धापी में तेरी जमीं तेरा आसमान ना छूट जाये || तू नहीं कोइ खुदा कही तुझे ये गुमा ना हो जाये संभाल लेना खुद को इस चकाचौंध से की कोइ तेरा अपना अँधेरे में ना ग़ुम हो जाये || जीवन की आपा - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये || प्रिया मिश्रा :)
वासना वासना की कड़ी धुप में प्रेम के बीज अँकुरित नहीं होंगे जल जाएंगे फलित नहीं होंगे संभल के रखना बीजो को कड़ी धुप में जो जल गए तो नहीं फूटेगा फिर , कभी कोपल प्रेम का || प्रिया मिश्रा :)
"क्यों है ऐसा" आज फिर रोने को जी चाहता है खबर नहीं है क्यों है ऐसा एक कमी सी लगती है कुछ खाली सा लगता है खबर नहीं है क्यों है ऐसा एक शाम को तेरे बिना गुजारना एक शाम को तेरे संग गुजारना एक शाम ठहर जाती है एक शाम रुला जाती है खबर नहीं है क्यों है ऐसा तू मुझमे कही बस गया है अब जाने की जिद न करना कुछ टूट जायेगा मुझमे तेरे दर्द को संभाल लुंगी लेकिन कुछ छूट जायेगा मुझमे तेरी खामोसी मेरे शब्द छिन लेगी खबर नहीं है क्यों है ऐसा तेरा होना मेरी जिंदगी है तेरा न होना मुझे बूत बना देता है सब कुछ खो के पाया है तुझे अब तू न खोना तुझे पाने की जिद्द नहीं ,शिद्दत हैं खबर नहीं हैं क्यों है ऐसा प्रिया मिश्रा :)
Perfect
ReplyDeletethank you g :)
ReplyDeletethank you :)
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