तुम मिलना

मुझे तुम आज मत मिलना
अभी मत मिलना
अभी चाँद तुम्हारे आँगन में होगा
और चांदनी पंखा झेल रही होगी
मुझे तुम तब मिलना
जब तुम्हे एक रोशनी चाहिए होगी
मैं तुम्हारे रस्ते में जुगनू बिछा दूंगी
मैं तुम्हे अंधेर में भी पहचान लुंगी ||

मुझसे तुम आज बाते मत करो
आज नजरे फेर लो
आज कोइ एहसान नहीं चाहिए मुझे 
मुझे तुम तब मिलना
जब तुमसे कोइ बातें करने वाला न हो
जब तुम्हारे होंठ सिले हो
जब तुम्हारे पास शब्द न हो ||
मैं तुम्हारे शब्द बन जाउंगी
मैं तुम्हारी राग बन जाउंगी
तुम्हारे कंठ को सुरीला कर दूंगी
और तुम्हारे कानो में फूलों  के शब्द डालूंगी
मैं तुम्हे अंधेर में भी पहचान लुंगी ||

मुझे तुम आज मत मिलना
मुझे तुम अभी मत मिलना
आज तुम्हारा आँगन हरा - भरा हैं
तुम्हे मेरी जरुरत नहीं हैं
मुझे तुम तब मिलना
जब तुम्हारा आँगन उदाश हो
जब तुम्हे अकेलेपन का एहसास हो
मैं तुम्हारे आँगन को हरा - भरा कर जाउंगी
मैं तुम्हारे अकेलेपन को मिटा दूंगी
मैं तुम्हे इंद्रधनुष की तरह सजा दूंगी
मैं तुम्हे अंधेर में भी पहचान लुंगी ||

मुझे तुम आज मत मिलना
मुझे तुम अभी मत मिलना
अभी तुम्हारे कदमो में जान हैं
अभी तुम्हारी आखो में  रोशनी हैं
तुम्हारे चहरे पे कांति हैं
मुझे तुम तब मिलना
जब तुम्हारा शरीर तुम्हारा साथ छोड़ दे
आँखों की रोशनी धीमी हो जाये
और पैर थक जाये
 मैं तुम्हे नई  रौशनी दूंगी
तुम्हारी सुंदरता  दिखाउंगी
तुम्हे पैरो से चलना फिर से सिखाऊंगी
मैं तुम्हे तब भी संभाल  लुंगी
मैं तुम्हे अंधेर  में भी पहचान लुंगी ||

प्रिया मिश्रा :)




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