मदद

मैडम अब कौन सा किताब लिखेंगी | शीर्षक क्या होगा ?
शीर्षक होगा मदद  , और नायक होगा ? क्या बताऊँ आप खुद पढ़ लेना |
अच्छा मैंडम कुछ तो बताये अपनी नई कहानी के बारे में |

कहानी नहीं ये आप बीती हैं | ये किताब का हर पन्ना मैं हूँ
और शब्द उसके नाम का हैं
बस इतनी सी कहानी हैं |
कोइ पन्ना खाली  नहीं छोडूंगी | हर पन्ने पे उसको उभारूंगी अपने सपनो की तरह |
मैं इस किताब में उसको एक चेहरा देना चाहती हूँ
एक ऐसा चेहरा जो सदा सबको याद आये और ललकार के कह जाये
मैं गुजरा नहीं हूँ |
 बलि चढ़ा गया हूँ |
इस खोखले समाज का | मुझसे तब सबने आँख मोड़ ली जब मुझे सबसे जायदा लोगो की जरुरत थी |
राह का हर जाता हुआ आदमी मुझे मरता छोड़ गया था | मैं तड़प रहा था और लोग फिल्म बना रहे थे |
अपनों के गुजरने का भी फिल्म बनाया हैं क्या ?
उसकी लाल आँखे और उसका दर्द दिखाना चाहती हूँ  की कैसे वो तड़पा  होगा , कैसे उसे पीड़ा हुई होगी |
कैसे वो आखरी वक़्त में अपने अपनों से मिलने की इक्छा रखते हुए चला गया
और मैं आखरी वक़्त में अपने सात फेरो का कसम न निभा पाई
जरा सा देर न हुई होती तो वो यहाँ  होता मेरे पास ,और मेरी बेटी जो आज अपने पापा से तस्बीरों में बात करती हैं वो उनकी बाँहों में झूला  झूल रही होती
अगर वो एक मदद उन्हें समय पर मिल गयी होती

प्रिया मिश्रा :)

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