इन्तजार

तेरे इन्तजार में सुबह गुजर गया
शाम गुजर गयी
रात गुजरने वाली हैं ||
खाली  बर्तन
टूटी आस
सब तेरी राह तकती हैं ||
तू जाके  प्रदेश
मनमीत कोइ और बना बैठा हैं
गले लगा के मुझको
किसी और से प्रीत लगा के बैठा हैं ||
चलो अच्छा हैं
खुश रहना
ये घर भी तुझे भुला बैठा हैं ||
तेरी यादो की समंदर को
खुद के महासागर में हमें बहा दिया हैं ||

अब तू नहीं
तेरी याद नहीं
हमने सब कुछ भुला दिया हैं ||

प्रिया मिश्रा :) :)

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