जब हम पहली बार चलना सीखते हैं जाने कितनी बार गिरते हैं |
लोग हस्ते हैं , पर हमें खबर नहीं होती |
हमारे पास चेतना नहीं होती
सिर्फ प्रयाश होता हैं और वो प्रयाश हमें खड़े रहने की प्रेरणा देता हैं ||
गिरने से जो चोट आती हैं वो हमें संभालना सिखाती हैं |
सँभालते हुए जब हम आगे बढ़ते हैं, तो कई और बधायें आती हैं |
और जब हम सारे बाधाओं को पार कर देते हैं तो हमें जीत हासिल होती हैं
और ये वो जित हैं जो हमारा पहला कदम तय करता हैं
तो चलते रहिये || कोइ साथ दे या न दे
मंजिल हमारी हैं, तय हमें करना हैं
प्रिया मिश्रा :)
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