मैं अपने सपनो के
नइया डुबोते जा रही

मैं अपने
अंतर्मन के
जंगल को
कतरते जा रही हूँ

रह जायेगा कुछ
वो भी सुख जायेगा

मैं कड़ी धुप
में अपनी
आकांक्षाओ
जलाते जा रही हूँ ||

प्रिया मिश्रा :))

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