सोच बदलने की जरूरत है
सोच बदलने की जरुरत है , लेकिन कैसे ? ऐसा क्या करे की जीवन में कुछ नया हो समाज में कुछ नया हो |
हमारे बच्चे कुछ नया सीखे ,उनमे कुछ नया करने की ललक हो .....इसके लिए हमें क्या करना चाहिए ?
हमारे देश , हमारे समाज और हमारे परिवार में कुछ नयापन आये इसके लिए हमें क्या करना चाहिये ?
कहने को हम सदियों से सदियां बदलते आ रहे है | रोज जाने कितने लोग मरते है कितने पैदा होते है |
असंख्य है ऐसे जो रोज नए सपने बुनते है और उनपे काम नहीं कर पाते |
कारन कई हो सकते |
जैसे उनका ख़ुद का डर
समाज का डर
माँ -पापा का डर
ख़ुद की रोटी न कमा पाने का डर
और जाने कितने डर होते है |
ध्यान से देखा जाये तो अगर हम कुछ न करे और बस किसी की नई सोच को नई और सही हवा भी प्रदान कर दे ना तो हम एक नए सोच के मालिक होंगे ||
लेकिन नहीं हम सब ये सोच के चुप कर रह जाते है ..... बरसो से चले आ रहे कानून को कैसे तोड़े | हम ही क्यों तोड़े ? मेरा बेटा या बेटी ही क्यों तोड़े ?
लेकिन हम कभी ये नहीं सोचते की कहीं से तो शुरुआत करनी होगी | कहीं तो आग जलानी होगी | कहीं तो क्रांति लानी होगी ............. लेकिन नहीं हम क्यों करे | हम नपुंसको की तरह सिर्फ ताली बजाना जानते है |
ये नपुंसकता से किसी लिंग भेद - भाव मत समझिये आप |
नपुसंकता मतलब हम कमजोर है ...अपनी सोच से ...अपने गंदे विचारो से | हम में पैदा होने के साथ ही डर का जहर भर दिया जाता है और वो जीवन भर चलता है |
लेकिन याद रखे आप .... हम सभी आज जिस परिवर्तन में थोड़े बहोत जी रहे है ना ........ वो किसी ना किसी बागी ने ही लाया है | जिसे हमने- आपने पहले समाज से बहिष्कृत किया है ....... फिर उसी नियम को अपनाया है ||
हमारे पास -दुसरो का घर उजड़ते देख .......किसी स्त्री या पुरुष को उनके बाहरी आवरण की वजह से उनका आकलन करना ........ बस यही काम रह गया है और यही काम हमें आता है |
हम ख़ुद तो कुछ करते नहीं..... कोइ और कुछ करे तो उसका मजाक उड़ाए है | उसके पैरों में डर नाम की बेड़ियाँ डाल देते है | उनके घर वालों का जीना हराम कर देते है | हम इतने गिरे हुए है की हमें शर्म भी नहीं आती |
हमारे समाज में इतने सारे क्रांतिकरी हुए ........ रानी लक्ष्मीबाई , भगत सिंह , आजाद , सुखदेव , राजा राम मोहन राय ........... और ऐसे कई लोग ..... सच बताना ऐसे लोगो के बारे में पढ़ के या सुन के आपक रगो का रक्त उबलता नहीं है |
समाज में हो रहे रोज नए हंगामे आपको बिचलित नहीं करते | आपके बेटियां आपक बेटे कोइ सुरक्षित नहीं है | ये सोच के आपको डर नहीं लगता है |
तो क्यों नहीं अपने बच्चो को नए जीवन की परिभासा समझाते हो .............. क्यों वही घिसी -पीटी नियम -कानून में बंधे हो |
क्या आप लोग अपने बच्चो की अपने दादा जी के कपडे पहनाते हो क्या आप अपने दादा जी के कपडे पहनते हो | कोइ नहीं करता ऐसा तो क्यों अपने दादा जी के नियम पे चल के अपने बच्चो को १०० साल पीछे ले जा रहे हो |
हर ५ सालो में सरकारें बदलती है ........... नए मंत्री आते है और नए नियम लागू हो जाते है .... लेकिन हमने कितने नए नियम बनाये जिस से हमारे समाज में कुछ नया परिवर्तन आये हमारे ख़ुद के जीवन में कुछ परिवर्तन आये | हम तो अपने बच्चो को भी पुरातन युग की तरह पालन -पोषण कर रहे है और सोच रहे है की सब नया हो | नहीं होता है ऐसा |
नहीं होता है ऐसा ना कभी होगा ................ तो आप कृपया कर के अपने बच्चो को कुछ नया करने की प्रेरणा दे | उन्हें उनकी नई सोच में उनकी मदद करे |
अपना सारा समय किसी की चुगली करने में ना निकले .............. दुसरो की कमिया निकालने से अच्छा है ख़ुद की कमियां निकाले ||
और किसी पे हसना तो बंद ही कर दे | क्योंकि ये कोइ नहीं जानता की आपका आने वाला समय कैसा होगा | आपक बच्चे आपका परिवार आगे जाकर किस परिस्थति में क्या निर्णय लेगा | तो दुसरो को नीचा दिखाना .... उनका अपमान करना ........... बंद करे |
सबसे पहले ये नई सोच लाये अपने जीवन में ||
आपकी हमारी नई सोच एक नई सुबह की तरह है | इस सुबह में कड़ी धुप भी हो सकती है ..............तेज़ बारिश भी हो सकती है .............. अँधेरा भी छा सकता है ........... और ठंडी -ठंडी सुबह के साथ इंद्रधनुष भी दिख सकता है | तो आप त्यार रहे .........इन सब नए परिवर्तन के लिए |
और अगर कुछ ऐसा दूसरे के साथ होता है ............ उसके नई सोच कभी उसको अँधेरा दिखा दे ....
तो ये कहने से कभी ना चुके की कोइ बात नहीं हम तुम्हारे साथ है ........... सब ठीक हो जायेगा ||
दुसरो पे हसने से अच्छा है ......... दुसरो को मुस्कुराना सिखाएं और ख़ुद भी सीखे ............. हमेसा ज्ञान ना दे ............. कभी साथ भी दे ............ जरुरी है,, नए वक़्त को नए सोच की ||
जय हिन्द
प्रिया मिश्रा :))
Comments
Post a Comment