जिस दिन मौसम
रूठा होगा
और
सूरज अपनी
तपीश में होगा
पेड़ ठूठ
हो चुके होंगे
हर जगह
अँधेरा
पाँव पसार
रहा होगा
उस दिन
कही से कोइ
स्त्री का
आँचल ...
बादल बन छा जायेगा
और
उसके घुँघरुओ
से एक संगीत
उत्पन्न होगा
और मोहित
कर देगा
सम्पूर्ण संसार को
फूटेंगे कई स्वर
उन स्वर से
ऊर्जा उत्पन्न होगी
उस ऊर्जा से
आकाश में
कम्पन होगा
उस कम्पन्न से
से वर्षा होगी
तब पुरुष
फिर से
हल उठा लेगा
और .....
उसके पसीने से
जमीन में
दरारें पड़ेगी
फिर स्त्री
डालेगी बीज़
नई सृष्टि का ||
प्रिया मिश्रा :))
24
Comments
Post a Comment