मैं चुप -चुप सा
तेरी गलियों से
गुजरता हूँ

मैं छुप -छुप के
तुझे पढता हूँ

प्रिया मिश्रा :)) 

 

 मनुष्य अपनी

 कस्तूरी नहीं

 ढूंढ पाता

 वो अपनी सुगंध

 दुसरो में ढूंढ़ते -ढूंढ़ते

 औरो के

 दुर्गन्ध से लिपट जाता है ||

 

 प्रिया मिश्रा :))

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