मैं गेहूं के
साथ गुलाब
की फ़सल
भी उगता हूँ
मैं ..........

रोजमर्या के
जरूरतों  में
प्यार भी लाता हूँ ||

प्रिया मिश्रा :))  

 

24 

आग का
अपना
कोइ घर
कोइ मकान
नहीं होता
वो किसी के
चूल्हे से
निकल कर
किसी का घर
जला देती  है
आग का
कोइ धर्म
कोइ इमान
नहीं होता ||

प्रिया मिश्रा :))

 

 मैंने कई धुन सुने
तुम्हारी आवाज के
संगीत जितना
मीठा कुछ नहीं ||

प्रिया मिश्रा :))

 

 सुनो ये गुलाब मैंने बिना पूछे चुरा लिया है तुम्हारे लिए ... ठीक वैसे ही ..... जैसे तुमने मुझसे बिना पूछे मुझे चुरा लिया है 

 

प्रिया मिश्रा :))

 

जब मेरी
आँखे थक जाती है
तुमको
निहारते हुए

मैं अपनी
आँखे ....
बंद कर लेती हूँ
और सपनो में
तुम संग
नवजीवन ...
सजाती हूँ

प्रिया मिश्रा :))

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