लिखने
चले थे कविता ....
तेरा नाम लिख गए
प्रिया मिश्रा :))
ज़ुबान की ख़ामोशी जहर है
अगर मन चीख रहा हो ||
प्रिया मिश्रा
सबसे बड़ा बदलाव
इंसान जानवर होते जारहे हैं
और ..
जानवर विलुप्त होते जा रहे हैं
प्रिया मिश्रा :))
हमने कभी तुम्हे
भुलाने की कोशिस नहीं की
वरना तुम और याद आते ||
प्रिया मिश्रा :))
मैं नफ़रतो के
मरुअस्थल में हूँ
प्रेम की बारिश का
ख़्वाब सजाये ||
प्रिया मिश्रा :))
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