इंदु ( लघु कथा )
इंदु का बचपन मैं नहीं जानती .......उम्र में मेरे से बड़ी थी | जब वो मेरे मुहल्ले में रहने आई थी..... उसकी शादी हो चुकी थी |
वो अपने मायके में रहती थी ..........उनका दूल्हा किसी और से शादी कर चूका था |
इंदु एक पढ़ी -लिखी औरत थी .............. समझदारी का पता नहीं ...........लेकिन अपने ही घर वालो और समाज के दकियानुशी ख़यालो में मारी गयी थी |
इंदु की शादी उसके माँ -बाप ने एक ऐसे लड़के से कर दी .............जो पहले से शादी -शुदा था | सिर्फ घर वालो के पास जमीं , पैसा ये सब देखकर | बाद में पता चला की वो शादी - शुदा है | इंदु को वहाँ से घर ले आये अपने |
इंदु के माँ - पापा ने कभी भी उसके दूल्हे को नहीं कहा की वो इंदु को ले जाये | उन्होंने कभी भी उसकी दूसरी शादी के लिए भी नहीं सोची |
इंदु का जीवन बस यूँ - ही चलता रहा |
कुछ सालो बाद .............उनके माँ -पापा गुजर गए | रिश्तेदारों ने अपने असली रूप से परिचय करवाया |
इंदु अपने बहन के घर रहने लगी | उनकी बहन ने खाने -पिने की चीजों में रोक लगनी शुरू कर दी | फ़्रीड्ज़ लॉक ................. किचन में लिमिटेड चीजे .........||
इंदु वहाँ से अपने घर वापस आ गयी |
लेकिन उनके लिए यहाँ भी चैलेंज कम नहीं थे | यहां पूरा समाज मुँह खोले खड़ा था |
इंदु शादी -शुदा होने के बावजूद कोइ श्रृंगार नहीं कर सकती थी | लोग इसे बुरा मानते थे |
इंदु ने अपना पूरा जीवन ....................एक ब्याहता होने के बावजूद ..................बिधवाओ की तरह गुजारा ...............................
दोही कौन है ?
माँ - पापा ?
समाज ?
इंदु का पति ?
इंदु की बहन ?
इंदु ?
सब दोषी है ................... लेकिन इंदु को मैं दोषी नहीं मानती |
क्योकि एक स्त्री जब अपने हक़ के लिए आवाज उठती है ना तो ...............उसे समाज से बहिस्कृत किया जा सकता है |
इंदु ने अपने माँ -पापा , अपनी बहन ,,,,,,,,,,,,और अपने सबके बारे में सोचा ................उसके बारे में किसने सोचा ||
एक स्त्री ........... का सबसे प्रिय ..........श्रृंगार करने का हक़........... उससे पुरे जीवन के लिए छीन गया था |
इंदु पूरी उम्र ...........एक लाश रही | उसके घर वालो ने उसे बरसो पहले फुंक दिया था ||
मैं ये नहीं कहती ..................सभी स्त्रियां सही है ......लेकिन जो सही है................. उनके लिया क्या सब सही है ?
प्रिया मिश्रा :))
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