ये सड़को पे
जितने चीथड़े पड़े है न
उसमे से
कुछ झूठे प्रेम
के नाम बलि
चढ़े है
कुछ
अंधे बिश्वाश के
और......
कुछ ..
आँखों से गिरती
पानी के शिकार
हो गए ||
हाय ...
हम मनुष्य
कितने बीमार
हो गए
सुनो ...
भेड़ियों
खेलना है तो
खुद से खेल के देखो
गुड्डे -गुड़ियों को
भी मत छूना
अपने पापी हाथ से
वो भी .......
कही तुम्हारी
तरह बीमार न हो जाये
वो भी
कारोबार शुरू कर दे
किसी को
प्रेम के नाम पे
लुटे .....
और कही
बिश्वाश का
गला न घोंट जाये ||
प्रिया मिश्रा :))

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