मैंने जितने हाथ
थामे थे ....

जिन्हे अपना
समझती थी

वो सब मोम के
पुतले थे ....

धुप जरा सी
तेज क्या हुई

सारे रिश्ते
पिघल गए

प्रिया मिश्रा :))  

 

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