ये महाकाव्यों के
पन्ने पलटते वक़्त
श्लोको के अर्थ
बदल जाते है
जब भूमिका
बदल जाती है
पन्ने पलटने वाले की
कोइ महाकाव्यों को
गलत ना समझे
ये महाकाव्य
अपनी शब्द पे
कायम है ....
इन्हे तोड़ -मड़ोड़
का पेश करना
एक सामाजिक
दृष्टिकोण है
जिसे दृष्टिदोष
भी कहा जा सकता है ||
प्रिया मिश्रा :))
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Marvelous
ReplyDeletethank you :))
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