लव लेटर्स  

 

 कल मिली वो हमको | गुलाबी सूट पहिने थी | इतनी सुन्दर लग रही थी,  का कहे जी चुरा एक ले गयी हमारा |
हम बिहार से है ..........पटना में रहते है पढ़ाई करते है |
यही हॉस्टल में रहते है | अब का करे नया उम्र है ,, सुन्दर लड़की देखे तो प्यार -स्यार तो हो ही न जाता है |

अरे ...छोड़िये  हमारी बातें .... मैडम के बारे में बताते है.... आपको |

हम यही अपने कोचिंग के सर से बतिया रहे थे ... तभी आई एकदम हेरोइन के जइसे ..... खट  -पट  उनकर सेंडिल करत रहिन |

 हम मुड़ के देखे आ देखते ही रह गए .......... इतनी सुन्दर , बा गजब ... तीखे -तीखे नाक -नक्स  ..... घुंघराले बाल , माध्यम कद ..... एकदम हमरे लिए हमको परफेक्ट लगी |

सोचे तनिक कुछु बतिया लेंगे ..... लेकिन हम खो गए ... कही ,, आ  मैडम चली गयी तुरंते ||

खैर सर्च ऑपरेशन चालू है ........... मिलते खबर करेंगे आप सभी को ...

अरे जे मैडम के बारे में बताते- बताते  एगो बातें बताना भूल गए |
कल यही सड़क पर पड़ा हमको एक लव लेटर मिला था ............ पढ़े थे
लिखा था

प्रिय ..झुलनिया
कैसे हो ?
क्लास कहे नहीं आती हो ?

तुम्हारा फोन नंबर मांगे तुम्हारी दोस्त से .......... मुँह चिढ़ा के भाग गयी ,, चोरनी ............... 

अरे हम तो ख़ाली तुमको अपना फ़्रेंडवा बनाये सोच रहे थे |
तुम हो की सबको हमें जीजा के रूप इ इंट्रोडूस करवा दी हो | 

कोइ बात नहीं ...... वैसे भी हम ... रोड के उठाये गिरे थोड़ी है ........ बाबूजी का हमरा दस बीघा खेत है | खुस रखेंगे तुमको |
सनीमा ले जायेंगे |
लेकिन तुम कहें हमको अपने दोस्त ग्रुप में ऐसे इंट्रोडूस करवाई  तुम्हारी दोस्तवा सब हमको .......अच्छा नहीं समझती है |

ये ... सुनो न हमको तुमसे सच्ची का प्यार है ......
हम तुमको परेशां नहीं करते है | वो तो पान - दुकनिया वाला तुम्हारा पीछा कर रहा था ..इसलिए हमको गुस्सा आ गया तो हम उसको पिटे आ तुमको घर छोड़ के आये थे |
लेकिन वो सब एके बार था |
फेर कबहुँ किये का हम तुम्हारा पीछा ||

ए ... सुनो ना
मान जाओ ... आवो कलसिया
हम कुछ नहीं कहूंगा माँ -कसम | बाकि तुम खुद से आके हाँ कह देना |

तुम्हारा
छेनी कुमार ||

पूरा पढ़ने के बाद कसम से लव लेटर से घृणा हो गया | नाम देखे है ......
कौन जमाना का है ............. एकदम घसीटा हुआ |

हम सोच लिए हम नहीं भेजेंगे अपने उनको लव लेटर्स ............ हम मोबाईल चिट्ठी भेजेंगे ||
तुम्हारा
प्रेम कुमार लिख के |

का जच  रहा है .. नाही

अरे उनका नाम हमको पता नहीं ......... न तो मिला के देखते
फलाना की फलानिया कैसा लगता है ||
हीईई रे ..........
खुदे लाज आ रहा है सोच के .....






भईया जी .......
आते है ...
चलिए चलते है
उनको भी तो ढूँढना है ||

प्रिया मिश्रा :))

 

 

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog