आजकल किताबें खुद को
पढ़ती है ...........
या दीमक चाट जाते है ||

आजकल मैदान
ख़ाली सा रहता है
या .....सूखे पत्ते
कभी -कभी
पोषम -पा
खेल लिया करते है ||

आजकल सभी जगह
ख़ाली सा है ....
बस लोगो दिलो में
कुछ गुब्बारे है
जो फूटते नहीं
भरे रहते है ||

प्रिया मिश्रा :))

Comments

Popular posts from this blog