लोग दो तरह के होते है
एक वो जो ....

खुद पत्थर हो जाते है
और दुसरो को भी अपने
आचरण से पत्थर बनाने
का प्रयाश करते है

दूसरे वो
जो खुद तो पत्थर हो जाते है
लेकिन उनकी ईक्षा यही होती है
जो उनसे मिले वो ...
फूल की तरह खिले
और अपनी खुसबू की
पनाहों में
महकता और
मुस्कुराता रहे  रहे  ||

प्रिया मिश्रा :))

Comments

Popular posts from this blog