जेठ की
कड़ी दुपहरी में जो
सिकुड़ के सोता है
वो भूखा पेट है

 माघ की सर्दी में जो
 अकड़ के लेटा है
 वो ठंडी लाश है

 
अंतिम यात्रा पे
दोनों .....
निकल सकते है

ये सर्दी -गर्मी
सब कहने की बातें है ||

प्रिया मिश्रा :))  

 

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