मैंने असंख्य कवितायेँ लिखी है ..परन्तु .... मैं नहीं लिख सकती .........तुम्हारे किसी भी भाव को अपने शब्दों में .....नाही तुम्हारे प्रेम को लिख सकती हूँ ,, मैं नहीं बांध सकती अपनी आँखों से बहने वाले उन अश्रुवो को

 

 .. ना ही मैं उन ओश की बूंदो को तुम्हारे होठो से चुरा कर कोइ कविता लिखना चाहूंगी कभी .............. जो गुलाब की पंखुड़ियों में छीप कर मेरे चेहरे को आकाशी रंग दिया करते है || प्रिया मिश्रा :))

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