मैं दर्पण नहीं देखती ........
मेरे केश खुले रहते है ..........
साज -श्रृंगार से मेरा कभी कोइ वास्ता नहीं रहा और वो मुझे देख के कहता है ....
बहोत सुंदर लग रही हो आज | मैं उसके कहने के बाद तुरंत ख़ुद को आईने में निहारती हूँ .........और .... कह देती हूँ पागल है |
प्रिया मिश्रा :))
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