किशोरावस्था वाला प्रेम 

 मैं जब पांचवीं कक्षा रही होंगी तब आया था वो मेरे मोहल्ले में ........... दिखने में साधारण से भी साधारण था | कद मुझसे भी छोटा ..........वो सांवला सा लड़का | उसकी मम्मी बीमार रहती थी .......... पापा की उम्र थोड़ी ज्यादा ही थी  | उसकी ७ बहने थी वो घर में सबसे छोटा था | लेकिन उसके सारे काम बड़े लोगो वाले होते थे | मुझसे उम्र में ज्यादा बड़ा नहीं था .......तीन साल बड़ा था ..... | पढ़ाई में तो इतना होशियार था ...
मेरा उसी से कम्पटीटशन रहता था हमेसा ..... उसको मालूम भी ना हो सायद | मेरे घर आया -जाया करता था | मुझे याद नहीं मैंने दसवीं से पहले कभी उस से अच्छी से बात की हो | एक बार तो इतनी डाँट लगाई थी ... घर रोता हुआ गया था  | मुझे पता नहीं उस से किस बात का गुस्सा था ................ वो था बहोत प्यारा सब उस से बहोत प्यार करते थे .... और मुझे यही बात चिढ़ाती थी .... मेरी माँ मेरे से ज़्यादा उसका ख्याल रखती थी | हमेसा अभिनाश ......अभिनाश और कोइ नाम आता ही न हो जैसे उसे | और मुझसे बड़ी चिढ हो जाती थी | 


मैंने  सायद पहली बार उस से अच्छे से बात की थी ...... होली के दिन ......... मेरी दसवीं की परीक्षा समाप्त हो गयी थी .......... मैं अपने कमरे में बैठ के कवितायेँ लिख रही थी .........
वो मुझे देख रहा था ......... मेरा ध्यान गया तो मैंने उस से पूछा यहाँ क्या कर रहे ? ..........

कुछ नहीं आप कुछ लिख रही थी तो आपको टोकना अच्छा नहीं लगा इसलिए इन्जार कर रहा था आपके फ्री होने का |
में कहा अच्छा ........ बोलो क्या काम है ?



वो बोला ........... हमेसा कुछ काम ही नहीं होता .....
आज होली है ... तो बस आपको गुलाल लगाने आया था | 

मैंने  कह दिया ........... नहीं अभिनाश सॉरी ......... मैं रंग नहीं लगाती ................ लेकिन सायद वो कुछ सोच के आया था ............. उसने अपने हथेलियों में भरा हुआ सारा रंग मेरी बालो में लगा दिया .......

और जाते -जाते कह गया ......... ये थोड़े से रंग से मैंने आपको अपना बना लिया .........
मैंने पूछा मतलब ............ बोला जब बड़ी होगी समझ जाओगी |

मैंने बुदबुदाते हुए उसे पागल कहा और अपने काम में लग गयी |
शाम में घर में कोइ नहीं था ........ वो फिर आया ........ इस बार मैंने सोच लिया था | इसको आज मजा चखाना है ..............

मैं उसके पास गयी ....... और मैंने बड़े प्यार से उससे बोला ..... अभिनाश दही -बड़े खाओगे |
वो कम सयाना था  .............. उसे मेरे बावले मिजाज के बारे में सब पता रहता था | बोला नहीं आपके हाथ से नहीं खाऊंगा ........ आंटी को आने दीजिये........... मैंने कहा फिर ठीक है .......... बैठे रहो मां नहीं आएँगी अभी ...... 

 

मैं  किचन में चली गयी ............ कुछ वक़्त के बाद मैं जोड़ से चिल्लाई............. वो दौड़ता हुआ आया ........ बोला क्या हुआ ? .. मैंने  कहा कुछ नहीं  ....... बस मन हुआ .......... बहोत शांति है न घर में |

वो हस्ते हुआ बोला तुम पागल हो क्या ?
मैंने कहा ... हाँ तुम्हे पता तो है |

अच्छा अब मैं चलता हूँ ...अंकल -आंटी सच में लेट आएंगे | यहाँ रहा तो तुम्हारे साथ पागल हो जाऊंगा ......ये कह के वो जाने लगा ............
मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था उस ............. मैं उस गुलाल वाले बात का बदला कैसे लूँ ..... इतनी आसानी से आज तक मैंने किसी को माफ़ नहीं किया और इसको .............मैंने .  उसको पुकारा .............
वो जैसे ही मुड़ा....................मैंने   उसपे ढेर सारा पानी फेंक दिया ...................
वो झलाते हुए मुझपे बोला ............ गुड्डन यार तुम ना .......

मैं हस्ते हुए पागल हुए जा रही थी तभी | ये सब मेरे पापा ने देख लिया ...................... जाने उनके दिमाग में क्या आया .............. वो हमारे बात करने से चिढ़ने लगे |
मैंने भी कभी उस दिन के बाद उस से बात नहीं की ................. वो छत पे रहता मैं अपने कमरे में चली जाती ......................... पुरे एक साल तक हमने बस एक -दूसरे को देखा ही होगा .......... वो भी कभी -कभी ||

ग्यारहवीं  में आने के बाद मेरी तबियत बहोत जयदा खराब रहने लगी .............. मैंने कुछ पढ़ाई नहीं की थी ...........और परीक्षायें सर पे थी............. परेशानी में मेरी और तबियत ख़राब  रहने लगी थी |

एक दिन अभिनाश मेरे कमरे में आया और बोला ........... तुम ठीक तो हो ? आंटी बता रही थी .........तुम्हारा सेलेबस पूरा नहीं हुआ ........... तुम चाहो तो मैं  तुम्हारी मदद कर दूंगा |

मैंने कुछ नहीं कहा ........ वो चला गया .......जाते जाते बुदबुदा रहा था ......पागल लड़की है ...........तबियत ठीक नहीं है .....फ़ैल होने वाली है ...........लेकिन अकड़ जाने किस बात की है |

दूसरे दिन उसकी बहन मेरे घर आई ........उसने मुझे कुछ पपेर्स दिए ............
वो सारे  पेपर्स .नोट्स थे ग्यारहवीं के एग्जाम के ................ और उसमे एक फॉर्म था  ..........यूपी बोर्ड का .............और एक छोटा सा नोट लिखा था उसमे ...........अगर इसमें पास ना हुई तो ये फ़ॉर्म डाल  देना ................ मैं इसका सारा नोट्स दे दूंगा तुमको ............ संस्कृत से है ........थोड़ा टफ होगा तुम्हारे लिए ........ बाकि तुम्हारी मर्जी ............अपना ध्यान रखना ...........
और ये सारे   नोट्स पढ़ लेना ..........दो महीने में तुम्हारे एग्जाम है ............ तुम तो कुछ बताओगी नहीं |
तुम्हे जाने क्यों मुझसे इतनी चिढ है ......... आंटी ने बताया तो मैंने सोचा तुमसे पूछे बिना ही तुम्हे नोट्स कर  के दे दू............... बाकि कुछ बुरा लगा तो सॉरी ||  


देखते -देखते दो महीने निकल  गए .........एग्जाम भी हो गया ........कुछ दिनों बाद रिसल्ट आया .....मैं पास थी | मैं उसके घर  उसको सॉरी और थैंक्स बोलने के लिए गयी थी | अभी दरवाजे पे ही गयी थी ..........तो सुना उसके पापा उसको डाँट लगा रहे थे | तुम उस से नहीं मिला करो ...........में ये नहीं कहता वो लड़की अच्छी नहीं है .........बहोत प्यारी है लेकिन बेटा हमारे कास्ट की नहीं है ना ............ बहोत मुश्किल से तुम्हारे दीदी का व्याह हुआ है |

अब ये सब कुछ हुआ ..........तो तुम समझ सकते हो बेटा
मैं अब सब समझ चुकी थी ...............मैं दरवाजे से ही लौट आई ...........
वो कई बार मेरे घर आया और गया ..... मैं उससे कभी नहीं मिली .............एक महीने के बाद मैं हॉस्टल चली गयी |

बाद में उसकी बहन से पता चला था ............... वो अभी दिल्ली में है ............
मेरी तो बस इतनी ब्लेसिंग है .......जहां भी रहे खुस रहे | उसने शादी  कर ली है  उसकी एक प्यारी सी बच्ची भी है .............

वो खुस है ....बस और क्या

प्रिया मिश्रा :))

 

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