मैं रात की रानी
जब आई मिलने दुब से  
दुब की पीड़ा मुझसे देखी ना गयी
देखा कही तो दुब बड़ी हरी -भरी थी  
कही उसका रंग पीला सा था
कही दिखा ही नहीं उसका अस्तित्व
बस मिट्टी का रंग ही दिखा
ये दुब के ह्रदय में कितने रंग थे
और कैसे छुपा के रखे थे उसने
अपने एक रंग को दूसरे रंग से
फिर भी मुस्कुरा रही थी  ||

प्रिया मिश्रा :) 

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