वे लड़कियां
बहुत खूबसूरत लगतीं हैं
जो
लिखते वक़्त दबा लेती हैं
अपनी लेखनी को
अपने दाँतो तले
और बिखेर देतीं हैं
शब्दों के मोतियों को
सफ़ेद से काग़ज़ पे
और
बन जातीं हैं
ख़ुद एक कविता
और
ऐसी कविता को
एक कवि अपनी कल्पनाओं में लिखता है।
प्रिया मिश्रा :))
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