मेरे ह्रदय में है, एक और ह्रदय ,, जिसे छू ना पाया अब तक कोइ
उस ह्रदय में एक और ह्रदय ,,वो ह्रदय मेरा ...पिंजरे में बंद मासूम बच्चे जैसा,, सच्चा हैं  लेकिन खाली सा है  .. वो जैसे कैदी रहते है ना... या जैसे परिंदे बंद रहते है, अपने पिंजरों में वैसे रहता है  ... जो नहीं करना चाहता किसी से अब कोइ फ़रियाद,, ना वो कोइ झूठी बातों का दिलाशा चाहता है  ... नहीं कोइ वादा लेना और देना चाहता है | वो बस जिस पिंजरे में बंद है उस से रिहाई चाहता है .... वो छोटा सा नन्हा सा ह्रदय मेरा ...रोज उस पिंजरे से अपना सर टकराता है और फिर आहात होके पिंजरे में ही खो जाता है ||

प्रिया मिश्रा :)

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