मैं ठहरी 

एक चंचल नदी सी

 तुम ठहरे समुद्र से गहरे

 और शांत

 तुममें डूबकर खो जाना

 मेरी चंचलता को विराम देता है.........

 प्रिया मिश्रा :))

 

 कुछ बातें

 भुलायें नहीं भूलती 

 और

 याद करने को 

दिल भी नहीं चाहता ||

 प्रिया मिश्रा :)

 

तू मेरी सारी अच्छाईयों सा है

 प्रिया मिश्रा :) 

 

 

 जिस दिन तुम्हें 

लगने लगे

 ख़ाली सा

 तुम्हारा आँगन 

 और ना सुनाई दे 

तुम्हें मेरे पायल के

 घुंघरुओं की आवाज़

 तो ठहरना ज़रा 

आँगन के बीचोंबीच

 खड़े पारिजात के पेड़ के पास

 तुम्हें उसके पुष्पों में 

मेरे घुंघरू छुपे मिलेंगे।

 प्रिया मिश्रा :))

 

 

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