|| राजनीति सिर्फ चर्चा का बिषय नहीं ||
वोट देना हमारा अधिकार है ......... लेकिन अधिकार का गलत उपयोग करना हमारा अधिकार नहीं है ............ हम हमेशा अपने फायदे के लिए ही सोचते हैं ...... क्या बढ़िया है हमारे लिए ... क्या ख़राब है हमारे लिए ....... या फिर सुनी - सुनाई बातों पर यकीं कर के ...... अपना कीमती मतदान कचरे के डब्बे में डाल देते हैं .... हमें वोट देते समय अपने पिछले साल के समय पर देखना चाहिए ....... बीते वर्षो में हमने जिसे अपना नेता चुना उसने हमारे लिए क्या किया ........ कितना किया ........ पहले के नेताओं के कार्यों से उसकी तुलना करनी चाहिए ........ पहले की तुलना में कितना विकास हुआ .... शिक्षा का स्तर कितना बढ़ा ... बेरोजगारी कितनी कम हुई ........ हमारे अन्नदाता के पक्ष में कितने फैसले लिए गए ....... भृष्टाचार कितना कम हुआ ........ शिक्षा प्रतिसत दर क्या है ? महंगाई बढ़ी तो उसके क्या कारण रहे?......... छोटे - छोटे उद्योगों पर कितना काम हुआ ? छोटे उद्योगों पर ध्यान देना ज़्यादा ज़रूरी है क्योंकि ... छोटे उद्योग हमें बेरोजगारी और आपराधिक गतिविधियों से बचाते हैं ......... रोजगार का ना होना .. युवाओं में सबसे बड़ा अवसाद का कारण है ...
देश के युवाओं में में राजनीती के प्रति उदासीनता ... गलत मतदान का ही परिणाम है ..हम सभी इसी देश के नागरिक हैं ... हम में से कुछ लोगो को ये तक पता नहीं है.... न ही बहुतों को ये पता है की देश में क्या -क्या बदलाव आये हैं ? क्या बदलाव पिछले पांच सालों में हुए हैं ... हम बस ऊपरी ज्ञान के बखान में व्यस्त हैं ..... जमीनी ज्ञान लेने की बजाय हम सभी सोशल मीडिया पे ट्रोल करने में लगे हुए हैं ... और जब इन सब से फुर्सत मिले तो खुद ही भृष्टाचार को बढ़ावा देने में व्यस्त हो जाते हैं ..... ट्रेनों में बैठ कर सिर्फ़ राजनीती पे बातें करने से सुधार संभव नहीं ... वास्तविक सुधार के लिए .. सुधार पे बात होनी चाहिए ... कौन सी सरकार कितना जमीनी स्तर पे काम कर रही है .. हमें उसकी जानकारी होनी चाहिए ... कमोजर वर्गों पर राजनीती करने की बजाय ... क्यों उनके हालात अभी तक नहीं सुधरे ... इस पर चर्चा होनी चाहिए ... उसके समाधान पे चर्चा होनी चाहिए ..... छोटी - छोटी इकाइयों पे कितना काम हो रहा है कितना हुआ है .... इस पर चर्चा होनी चाहिए .... लेकिन हम इन सब मुद्दों से हट कर .. हमेशा महिलाओं .... ग़रीबी ....... अशिक्षा , जाती और धर्म की चर्चाओ में व्यस्त हैं ....... हमारी खोखली व्यवस्था का राज ये सारे मुद्दे नहीं .... हमारी सोच है ..... जो हर साल इन सब कमजोरियों पे चर्चा करती है .......... और हर साल एक कमजोर सरकार लाती है ......... ताकि अगले पांच साल तक ....... ये चर्चाएं होतीं रहें ............. हम महिलओं की सुरक्षा की बात करते हैं और उन उमीदवारो को वोट देते है ....... जो कहते हैं की .. अगर हमारी सरकार आई तो बलात्कारियों को फांसी की सजा नहीं दी जाएगी ... हर जगह धर्म के नाम पर लोगों के वोटों को ठगा जाता है ...... और हम आँखों पर पट्टी बांध के अपने देश का भविष्य निर्धारित करते हैं। अभी भी वक़्त है .... हमारा वोट कीमती है ...... इसकी कीमत पहचानें और सही उमीदवार को वोट दें |
अगर हम सभी देशवासी .... धर्म, जाति, पुरुष, स्त्री, ऊंच- नीच, दलित, सवर्ण, अल्पसंख्यक, से आगे बढ़कर सिर्फ़ और सिर्फ़ राष्ट्रहित के लिए सोचें तो जरूर हम एक अच्छे मतदाता के साथ साथ एक अच्छे देशवासी बन पाएंगे और एक सच्चे व अच्छे राष्ट्र का निर्माण कर पाएंगे .....
प्रिया मिश्रा :))
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