मनुष्य जब थक जाता है
झूठे रीती- रिवाजों से
और खुद के,
खोखलेपन से
तो वह चाहता है
एक पूर्णविराम ,
जो उसे पत्थर कर दे वही
जहाँ वो खड़ा है

प्रिया मिश्रा :)  

 

 

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