जब कैकई ... अपनी ग़लतियों का पछतावा करती है
और कहती है....श्री राम से
हे ,, पुत्र लौट चलो अब
महल में ...
अयोध्या तुम्हारी राह तक रही ...
तब उनके इतना कहने भर से
क्या दशरथ स्वर्ग से वापस आ गए थे ?
या ,, जब भरत प्रभु
चले थे...  नंगे पाँव
लेकर खड़ाऊं भगवान् का
तब उनके पैरों से जो लहुं
बहा था ,, उस लहुं से क्या
धूल गया कलंक
कैकई का...
ना ,, नहीं हुआ था ऐसा
ना... होगा कभी ऐसा
कैकई कल भी कलंकित थी
कैकई आज भी कलंकित है ||

प्रिया मिश्रा :)) 

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