मुझे कहानियाँ पढ़ना बहोत अच्छा लगता है .... लेकिन सुनना तब अच्छा लगने लगा ... जब से तुम्हे सुना है | वो जो तुम कहानियाँ सुनाते - सुनाते पूछते रहते हो ... सो गयी क्या ? ... सो ही गयी होती हूँ मैं ...... क्युकी मैं जीवन्त करना चाहती हूँ उस पल को जो कहानियों में शब्दो के रूप में बिखरा रहता है | आज ईश्वर से कुछ मांगना चाहती हूँ ... की यूँ पूरी उम्र तुम मुझे कहानियाँ सुनाओ और मैं तुम्हारे समीप तुम्हारे कंधे पे सर रख के सुनती रहुँ |
सोचती हूँ जब  तुम और मैं साथ -साथ होंगे ,, तब उस कॉफ़ी में उतनी स्वाद न होगी जितनी तुम्हारी कहानियों में होगी .... लगता है तुम्हारे पास आने के बाद मेरी कॉफ़ी की आदत भी जाती रहेगी ... मेरे दिन भर की भाग -दौड़ की थकान को तो तुम यूँ ही अपनी मीठी बातो से दूर हटा दोगे ||
सच कहूं मुझे उन कहानियों से  कोइ लगाव ना होता है .... जो कुछ भी सुनती हूँ ... सिर्फ तुम्हे सुनती हूँ ||

प्रिया मिश्रा :)  

 

 

 
 
 
 
 


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