फिल्म जगत के प्रभाव और दुष्प्रभाव
मैं जब फिल्म जगत को देखती हूँ सोचने पर मजबूर हो जाती हूँ की ऐसा क्या है इस जगत में जो सब पागल हुए जा रहे है | एक तरह से देखा जाये तो जैसे हम सब अपना कार्य करते है , वैसे ही ये लोग भी अपना कार्य करते है , इनका कार्य इनकी जीविका का साधन है | इनके एक साल में १० फिल्मो रिलीज़ करने से हमारा पेट नहीं भरेगा | नाही भरेगा उन सारे किसानो का जो की भूख से बेहाल हैं | मैं मानती हूँ की फिल्म जगत के लोगो ने हजारो किशानो की मदद की | लेकिन मेरा ये पूछना है उन सभी समाज के ठेकेदारों से की ये नौबत ही क्यों आई की हमारे अन्नदाताओं को किसी के आगे हाथ फैलाना पड़ा | मैं पूछना चाहती हूँ , उन तमाम राजनेताओ से की देश की तरक्की कैसे होगी अगर देश के अन्नदाता ही ना रहे तो | एक भूखा देश किस खम्भे पर खड़ा रहेगा |
ये अमीरी की कोठी भी तभी अच्छी लगती है जब पेट भरा हो | लेकिन हमारे यहाँ तो हमारा पेट भरने वाला ही भूखा सो रहा है | उनके बच्चे शिक्षा को तरस रहे है | इस देश के बहोत कम लोगो ने इस मुद्दे को उठाया है | बहोत कम लोगो ने इस मुद्दे को भी उच्च स्तर पे ले जाने की मांग की है ||
हमारी युवा पीढ़ी तो , फिल्म जगत की गुलाम है ....... या फिर गुलाम है अपनी सोच की ..... हरी हुई खोखली और दिखावे की दुनिया में ........ अब तो सिर्फ धुएं ही निकल रहे है |
ये आये दिन समाचार पत्रों में आने वाली खबरे ..... गांजा और चरस की बातें क्या ये है हमारे देश का भविस्य | क्या इसलिए हम इस इंडस्ट्री को इतना बढ़ावा देते आ रहे है |
नेता हो या अभिनेता चलता वो जनता की बदौलत है | अपनी पूंजी को आप कहा जाया कर रहे इस्पे बिचार करना अब जरुरी है |
अभी के कुछ वर्षो से जिस तरह की फिल्मो को लाया गया हमारे समाज में क्या वो सही है | पारिवारिक फिल्मे बंद हो गयी | अश्लीलता की दूकान खुली हुई है | हम अपने बच्चो को कहा तक छुपा के रख पाएंगे इन सब चीजों से | समाज का भी एक अपना प्रभाव होता है |
मैं अपील करना चाहूंगी इस फिल्म जगत की दुनिया से ... ये समाज आपके रंग - ढंग में ढलता है | अपने रूपों जरा सा चरित्र लाये | पहले के फिल्मे जो दिखाई जाती थी | वो भी सुपर हिट हुआ करती थी | ये चरस, गांजा ,अश्लीलता , अभद्रता इनसे अलग भी कुछ सोचा जा सकता है | सिर्फ धन अर्जित करना ही अपना धेय न बनाये | ये समाज आपका अनुसरण करता है ||
और मैं अपील करना चाहूंगी देश के लोगो से इंटरटेनमेंट तक ही रखे इन्हे निजी जीवन में ना लाएं | अपने जीवन को उनलोगो की सेवा में बिताने का संकल्प ले जो वास्तव में आपके हीरो हैं |
हमारे किसान भाई , हमारे सैनिक , हमारे शिक्षक और वो तमाम लोग जो देश और समाज की सुरक्षा और उसकी ब्यवस्था बनाये रखने में योगदान देते है ...... ये सभी हमारे देश के सच्चे हीरो है | इनको सोच को बढ़ावा दे | नाकि एक ऐसी समाज को बढ़ावा दे जो आने वाले वक़्त को कोढ़ी करने में लगा हो | हमारे बच्चे हमारे भविष्य है और हमारा भविस्य खतरे में है | बिगुल बज चूका है .. नंगे तांडव का | अभी न रोका गया इनसब चीजों को तो .. वो दिन दूर नहीं जब सबकुछ नंगा पड़ा होगा और हम ढूंढ रहे होंगे अपनी मरी हुई आत्मा को |
ये जितने भी अवार्ड फंक्शन होते है .. ये
सिर्फ फ़िल्मी जगत के लिए ही क्यों है | ये आम लोगो के अच्छे कार्यो को
बढ़ावा देने के लिए क्यों नहीं है | क्यों आम लोगो के अच्छे कार्यो का
सार्वजनिक रूप से सराहा नहीं जाता | क्यों एक अच्छे फसल उगाने वाले किसान
को उनके कार्य के लिए सम्मानित किया जाता | इसे क्यों टेलीविज़न पे नहीं
लाया जाता |
सोचने का बिषय है | समझने का बिषय है | सोशल मीडिया जैसे प्लेटफार्म को भी इन सब चीजों से दूर रखा गया है |
अब
जरुरी है की हम इस खोखली सभ्यता के दिखावे से कुछ अलग सोचे | ये धर्म का
झूठा तांडव बंद करे | किसी के मौत पे शोक मानाने की बजाये उसपे विचार करे
की आखिर क्यों ऐसा हुआ | उन सारे लोगो को बढ़ावा दे जो ....... प्रकृति की
सुरक्षा में अपना योगदान दे रहे है |
जो हमारी संस्कृति को जिन्दा रखे वही हमारा हीरो है
जो हमारा पेट भरे वो ही हमारा हीरो है ||
हमारे
बच्चे और हमारा भविस्य बारिश की बुँदे है | अब तय हमें करना है की इसे
सीपी में डाल के मोती बनाना है या गटर में डाल के कीचड़ || आपकी सोच आपके
हाथ में है | गंभीरता से सोचे और निर्णय ले |
जय हिन्द ||
Comments
Post a Comment