थका हुआ सा मन
उदाश आँखे दे जाता है ||
प्रिया मिश्रा :)
मैं अपने कर्म की भूमि में
एक अनोखा बीज रोपित करना चाहती हूँ
उस अनोखे बीज की चाह में
भटक रही हूँ
सूर्य की गर्मी
और चाँद की सीतलता दोनों
से प्रेम करे
ऐसा बीज अभी तक मिला नहीं
इसलिए अभी तक
मेरी कर्म भूमि बंजर सी है
प्रिया मिश्रा :)
थका हुआ सा मन
ReplyDeleteउदाश आँखे दे जाता है ||
thank you bhaskar ji
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