पैरों की थकान

 मंजिलों को नहीं रोक पाती

 हार मन की हो तो जीतना मुश्किल है
 वरना 
लहू लगे पैरों ने खुद के लिए मंजिल तराशी है 
और दूसरों के लिए रास्ते बनाये हैं।। 
 
 प्रिया मिश्रा :)
 
 
ठहर जाती हैं...आँखें
 वहाँ पे...जहाँ पे 
 
 कोई कह जाता है 
इन्जार करना मेरा 
मैं लौटकर आऊँगा।।
 
 प्रिया मिश्रा :) 
 
 
पुराने वक़्त को लौटाया नहीं जा सकता है
 परन्तु
 नए वक़्त की ओर
 पुराने वक़्त से शिक्षा लेकर
 कदम बढ़ाया जा सकता है।।
 प्रिया मिश्रा:)) 
 
 
किसी की देह के
 घाव को 
औषधि द्वारा
 मिटाया जा सकता है
 लेकिन किसी की 
आत्मा के घाव के लिए
 कोई औषधि नहीं बनी है।। 
 
 प्रिया मिश्रा :)) 
 
 
 न कभी खुद को 
और
 न ही अपनी कविताओ को 
रखना चाहती हूँ....मैं
 संकुचित
 मैं देना चाहती हूँ 
सम्पूर्ण आकाश 
और सम्पूर्ण धरती
 अपने शब्दों को 
 और 
शब्दों में समेट देना चाहती हूँ 
अपनी आत्मा को।।
 
 प्रिया मिश्रा :))

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